तू कबीर-रैदास को पूजो
तो मैं तुलसी को पूजूं
तू गौतम बुद्ध को पूजो
तो मैं तेरे मनु को पूजूं
तू आंबेडकर को पूजो
तो मैं तेरे राम को पूजूं
तू पेरियार को पूजो
तो मैं तेरे श्याम को पूजूं
तू फुले-शाहू को पूजो
तो मैं तिलक को पूजूं
मैं जानता हूं तू नहीं पूजेगा
हमारे कबीर-रैदास, दादू को
बुद्ध, आंबेडकर, फुले को भी
पेरियार, शाहूजी महाराज को
तो मैं क्यों पूजूं तेरे राम को
तेरे श्याम, तुलसी, तिलक को
तेरी आस्था तेरे आराध्य में है
और मेरी मेरे महानायकों में है
जैसी तेरी भावनाएं हैं नाजुक
वैसी मेरी भावनाएं हैं कोमल
तू आहत होते राम के तिरस्कार से
मैं होता आंबेडकर के अपमान से
मैं जानता हूं कि
तेरे भगवान काल्पनिक हैं
मेरे महानायक वास्तविक हैं
तेरे ईश्वर मेरे नहीं हो सकते
मेरे महापुरुष तेरे नहीं हो सकते
क्योंकि दोनों हैं दो विपरीत ध्रुव
एक उत्तर तो दूसरे हैं दक्षिण
क्या दो ध्रुव एक हो सकता है?
© संतोष सारंग


0 Comments