----------- संतोष सारंग इस बरसात सांप ने फिर उतारा केंचुल मगर तुम कब उतारोगे सामंतवाद का केंचुल जातिवाद का केंचुल छुआछूत का केंचुल लिंग भेद का केंच…
Read moreदो ध्रुव
तू कबीर-रैदास को पूजो तो मैं तुलसी को पूजूं तू गौतम बुद्ध को पूजो तो मैं तेरे मनु को पूजूं तू आंबेडकर को पूजो तो मैं तेरे राम को पूजूं तू पेरियार को …
Read moreशहीद की परिभाषा
अब बदल जाएगी 'शहीद' की परिभाषा जो हाथों में ले लहराएगा अवैध पिस्टल सिस्टम और सरकार को ललकारेगा वर्दीधारियों को कॉलर पकड़ खींचेगा पुलिसवालों को …
Read moreचौकीदार चुप है
चोर ने मचाया था शोर, लगा के जोर कि मैं चौकीदार हूं इतना सुनना था कि लग गई लाइन चौकीदारों की पीएम चौकीदार सीएम चौकीदार एमपी चौकीदार एमएलए चौकीदार …
Read moreमैं क्यों पूजूं
--------------- © संतोष सारंग मैं क्यों जाऊं तुम्हारे मंदिरों में जहां अछूतों का प्रवेश वर्जित रहा जिसने स्त्रियों को बनाया देवदासी मैं क्यों पूजूं तेरे…
Read moreशब्दावलियां
हमारी शब्दावली में दर्ज हैं प्रेम-मोहब्बत, सत्य-अहिंसा सच्चाई, स्नेह, समानता नैतिकता, सिद्धांत, मर्यादा संवैधानिक मूल्य, लोकतंत्र मानवता, सहिष्णुता, न्…
Read moreअब पढ़ाए जाएंगे
अब पढ़ाए जाएंगे तथ्यहीन इतिहास, झूठी कहानियां काल्पनिक कथाएं, मिथक अनुश्रूतियां अधकचरा ज्ञान व लुगदी साहित्य अब पढ़ाए जाएंगे दुनिया के पहले पत्रकार थे …
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