रॉ मेटेरियल

----------------------कविता   © संतोष सारंग  तुम भूख से तड़पते हुए मर जाओगे तो, मैं एक कालजयी कविता लिखूंगा  तेरे पेट की पीड़ा को छंदों में पिरोऊंगा  इस तर…

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केंचुल

----------- संतोष सारंग  इस बरसात  सांप ने फिर उतारा केंचुल  मगर तुम कब उतारोगे  सामंतवाद का केंचुल  जातिवाद का केंचुल     क्योंकि जहरीले जीवों को  उतरना …

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दो ध्रुव

तू कबीर-रैदास को पूजो  तो मैं तुलसी को पूजूं  तू गौतम बुद्ध को पूजो तो मैं तेरे मनु को पूजूं  तू आंबेडकर को पूजो  तो मैं तेरे राम को पूजूं  तू पेरियार को …

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शहीद की परिभाषा

अब बदल जाएगी 'शहीद' की परिभाषा  जो हाथों में ले लहराएगा अवैध पिस्टल  सिस्टम और सरकार को ललकारेगा  वर्दीधारियों को कॉलर पकड़ खींचेगा  पुलिसवालों को …

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चौकीदार चुप है

चोर ने मचाया था  शोर, लगा के जोर कि मैं चौकीदार हूं इतना सुनना था   कि लग गई लाइन  चौकीदारों की  पीएम चौकीदार  सीएम चौकीदार  एमपी चौकीदार  एमएलए चौकीदार  …

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मैं क्यों पूजूं

--------------- © संतोष सारंग   मैं क्यों जाऊं तुम्हारे मंदिरों में जहां अछूतों का प्रवेश वर्जित रहा जिसने स्त्रियों को बनाया देवदासी मैं क्यों पूजूं तेरे…

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